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मुख्यमंत्री की तानाशाही का विरोध

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आज दिनांक २२. ०५ २०२१ को मुख्यमंत्री जी के समीक्षा बैठक हेतु कानपुर आगमन पर आज जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करके कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों पर चर्चा करने का प्रोटोकॉल भेजा था। परंतु प्रोटोकॉल कुछ और होता है, और शासन की मंशा कुछ और होती है, इसलिए मुख्यमंत्री जी सिर्फ सत्ता के जनप्रतिनिधियों से मिलते है। विपक्ष की आवाज सुनना उन्हें गवारा नहीं होता परंतु हम विपक्ष के रूप में भी जनता के प्रति उतने ही जवाब देह है, जितने सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि है। 

इसलिए जब आप कानपुर में कोविड कमांड सेन्टर का निरीक्षण करने एवं समीक्षा बैठक करने आ रहे हैं, तब आपके संज्ञान में लाया जाना अति आवश्यक है। कि जब अप्रैल के प्रथम सप्ताह में जब कोविड-19 द्वितीय लहर अपने प्रचंड रूप के तरफ बढ़ी तब पूरे उत्तर प्रदेश की तरह ही कानपुर का भी  प्रशासन उसके लिए तैयार नहीं था। हमें याद आता है फरवरी माह में जब विधानमंडल का सत्र चल रहा था। तब अनेक मौके ऊपर विपक्ष ने कोविड-19 आने वाले खतरों से सरकार को आगाह करने का प्रयास किया। परंतु अहंकार में डूबी हुई  सरकार ने लगातार कोविड-19 फेज- वन के अपने प्रबंधन को लेकर के अपनी पीठ थपथपाने मे ही अपनी उपलब्धि समझी और विपक्ष की चेतावनी को लगातार नजरअंदाज किया। 

 

जब कोविड-19 द्वितीय लहर आई तब सरकार किसी तरह से तैयार नहीं थी। ना अस्पताल तैयार थे ना बेड थे ना ऑक्सीजन के प्लांट  थे न ही ऑक्सीजन सिलेंडर थे तो इसलिए आज हम लोगों को निम्न बिन्दुयों पर गंभीर चिंतन करना चाहिए :

√ क्या हम उचित समय पर जनता को बेड उपलब्ध करा पाए? 

 

√क्या हम उनको ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कर पाए? 

 

√क्या हमारे पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर थे? 

 

√क्या हम ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ लगने वाला फ्लो मीटर तक उपलब्ध करा पाए? 

 

√क्या हम जरूरत पड़ने पर जनता को रेमडेसीविर/टोकलीजुनैब जैसे जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध करवा पाए? 

 

अगर हम नहीं करा पाए तो जिम्मेदार शासन प्रशासन के कौन लोग हैं? और उन पर हमने क्या कार्रवाई की । 

 

आपके संज्ञान में लाना कानपुर के महत्वपूर्ण मुद्दे लाना जरूरी समझता हूं की उर्सला अस्पताल में दिसंबर में एक ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगने का प्रस्ताव आया था जो कि यदि समय से लगा होता तो बहुत राहत उर्सला के अस्पताल से ही मिल जाती परंतु उसका भी अनेक प्रयासों के बाद उदघाटन अभी पिछले हफ्ते ही हो पाया। ऐसी अनेक लापरवाही हुई हैं. और यह जो कोविड कमांड सेंटर है (जिसका आप निरिक्षण करने आ रहे हैं ) यह सिर्फ एक सफेद हाथी बन के रह गया है। यहां से किसी को राहत नहीं मिली। लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च करने के बाद अपनी जाने गवायीं हैं एवं कोविड-19 कमांड सेंटर से फर्जी आंकड़ों की प्रस्तुति हुई है।

 

आरटी पीसीआर एवं एंटीजन टेस्टिंग की संख्या पीएचसी एवं सी एच सी में 50 की सीमित कर दी गई थी जिसके कारण जांच सही नहीं हो पा रही थी। एक RT-PCR की रिपोर्ट 4 से 5 दिन में भी नहीं मिल रही थी।

 

प्रशासन का एक खेल यह भी की कोविड-19 की जांच न करके रिपोर्ट न दे कर के संख्या कम दर्शाने का लगातार प्रयास किया गया जिससे कि समस्या बढ़ गई। सरकार द्वारा सही समय पर लॉकडाउन नहीं लगाया गया। जब व्यापारियों ने सेल्फ लॉकडाउन लगा कर के आत्म संयम का परिचय दिया, उसके बाद सरकार चेती फिर भी पंचायत चुनाव पूर्ण होने का इंतजार करती रही। सरकार ने पंचायत चुनाव पूर्ण होने के बाद ही लॉकडाउन लगाने का निर्णय लिया। तब तक कोरोना बहुत ज्यादा फैल चुका था।

कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों की बाजीगरी के संबंध में अवगत कराना चाहेंगे कि कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों में बड़ी बाजीगरी हुई है। कई बार जो को कोविड सस्पेक्ट में जिनका ईलाज हुआ जिनकी आरटीपीसीआर पॉजिटिव नहीं थी कोरोना पेशेंट थे उनकी मौतों को कोरोना की मौतों में नही गिना गया है।कयी लोग जिनका कोविड का ईलाज के दौरान आरटीपीसीआर निगेटिव आ गई लेकिन वो पूर्णतया ठीक नहीं हो पाये। उनकी निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर कोविड से मृत्यु होने के बाद भी कोविड की मौत के आंकड़ों में नहीं लिया गया। इस प्रकार से कोविड-19 से जो असल मौतें हैं उनमे और सरकारी आंकड़ों में कई गुना का फर्क है।

 

महोदय उपरोक्त के विषय में क्षेत्र की जनता की और से हम आपसे निम्लिखित मांग करते हैं :

 

1. हम आपसे करबद्ध अनुरोध करते है कि आप आंकड़ों की बाजीगरी में पड़ने के बजाय अधिकारियों की दिखाई हुई फिल्म देखने के बजाय अपनी आंखों से जनता का दुख, दर्द, तकलीफ को महसूस करें और कोविड-19 का बेहतर प्रबंधन करें, और कोविड-19 हुई मौतों का सही आंकड़ा निकाल कर के आगे आने वाली समय की बेहतर तैयारी करें l कोविड से हुई मौतों का असली आंकड़ा जानने के लिए जनपद के सभी शमशान एवं कब्रिस्तान में हुई अंत्येष्टि के आंकड़ों को निकलवाये जाये। एवं उन आंकड़ों का पुनः सत्यापन करके मौत के कारणों को जाना जाए तो कोविड-19 से हुई मौतों की सही संख्या सामने आएगी। मृतकों के परिजनों से बात करके किन समस्याओं के वजह से मौतें हुई?

 

2. कहां इलाज का अभाव रहा?  कहां क्या कमी रही? उनका भी सही आंकड़ा निकाला जाए।

 

3. मृतकों के परिजनों को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत  ₹ 400000.00 का मुआवजा प्रदान किया जाए 

अगर मृतक अपने परिवार का मुखिया है तो उसके परिवार को ₹ 10000.00 प्रति माह गुजारा भत्ता दिया जाए 

 

4. मृतक परिवार के बच्चे यदि शिक्षारत हैं तो उन बच्चों की शिक्षा का खर्च सरकार द्वार दिया जाए 

 

जब तक हम मौत के आंकड़ों को छुपायेंगे। सही तथ्य सामने नहीं लायेंगे तब तक हम पीछे अपने द्वारा हुई कमियों को नहीं जान पाएंगे और आगे आने वाले समय के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर पाएंगे।

 

√ इन्हीं सब मांगों के साथ में मेरी पूर्व की मांग पर डफरिन अस्पताल में बनने वाले एनआईसीयू को समय से पूरा किए जाए 

 

√ के.पी.एम. अस्पताल में आईसीयू बनाया जाए 

 

√ धनकुट्टी में नगर निगम के अस्पताल का पुर्ननिर्माण तत्काल कराये जाने की भी मांग करते है।

 

आपसे आशा करते हैं की उक्त पर निर्णायक कार्यवाही करके जनता को राहत पहुचाएंगे l 

 

इसके अतिरिक्त चूंकि इस आत्ममुग्ध सरकार में आपसे मिलकर जनता की मांगे और समस्याएं रख पाना संभव नहीं है अतः आज हम अपना मुंडन करवा के मृतक आत्मायों को श्रद्धांजलि देते हैं एवं सरकार के कुप्रबंधन का विरोध करते हैं l 

 

इस मौके पर नीरज सिंह , आफताब आलम भोलू , वीरेंदर त्रिपाठी, करुणेश श्रीवास्तव , नसीम अहमद , चेतन पाण्डेय , आशीष पाण्डेय, सौरभ गुप्ता, शांतनु सिंह , कृष्णा शर्मा आदि लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मौजूद रहे।

    Mohd Aman

    Editor in Chief Approved by Indian Government

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